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परिचय

 नाम -इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना पिता का नाम- स्व.श्री मुरारी लाल सक्सेना शैक्षणिक योग्यता - DCE(Hons.),B.E.(Civil), MA ( Sociology), LL.B., ...

Wednesday, September 30, 2020

मुक्तक जब तुम्हारे राज में

 #मुक्तक #अवधेश_की_कविता  

जब तुम्हारे राज में जुर्म इतने हो रहे।

तुम स्वयं अपराधियों के खून धब्बे धो रहे ।

शर्म आती हो अगर तो शीघ्र कुर्सी छोड़ दो ।

न्याय बेटी को दिलाओ वर्ग बंधन तोड़ दो ।


भक्त हो गर राम के तो सीख भी लो राम से ।

दंड दो अपराधियों को राम के ही धाम से ।

ढोंग करना छोड़ दो अब बात मेरी मान लो ।

योग करना राज करना हैं अलग ये जान लो।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना

शिवपुरी मध्य प्रदेश

मत्त सवैया छंद काम नहीं कुछ आ सकती

 #अवधेश_की_कविता #मत्त_सवैया_छंद में एक रचना 


काम नहीं कुछ आ सकती जब,

ये धन दौलत और कमाई ।

तो फिर क्यों करता रहता श्रम,

क्यों फिर इसमें जान फँसाई ।

छोड़ सभी जग के अब बंधन,

झूठ इन्हें कहते सब भाई ।

मान उसे जिसने यह सुंदर,

जीवन की बगिया महकाई ।


नाम जपें  जब राम सिया तब,

काम सभी बनने लगते हैं ।

ध्यान लगे जब कृष्ण पदों पर,

कष्ट सभी मिटने लगते हैं ।

भक्ति करें जब ध्यान लगा कर,

राम कृपा करने लगते हैं ।

प्रेम रहे बस ईश्वर से तब,

पुष्प सुधा खिलने लगते हैं ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना- 28092020

शिवपुरी मध्य प्रदेश

Thursday, September 24, 2020

ग़ज़ल क्या पता क्या गिला हो गया

 #ग़ज़ल #अवधेश_की_ग़ज़ल #अवधेश_की_शायरी #हिंदुस्तानी_ग़ज़ल

#क्या_पता_क्या_गिला_हो_गया ।


क्या पता क्या गिला हो गया ।

आशना क्यों ख़फ़ा हो गया ।


अब हमें होश आता नहीं,

क्या पिया जो नशा हो गया ।


हम वफ़ा पर वफ़ा कर रहे,

पर सनम बेवफा हो गया ।


आसरा इल्म सबको दिया,

फ़र्ज़ अपना अदा हो गया ।


ज़िंदगी में उन्हें पा लिया,

प्यार का सिलसिला हो गया ।


इश्क़ में जो ज़रा शक हुआ,

बीच में फासला हो गया ।


जो हुआ वो नहीं था सही,

ये गलत फ़ैसला हो गया ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना-24092020

शिवपुरी मध्य प्रदेश

ग़ज़ल आस के डदीप पास जलते हैं

 #ग़ज़ल #अवधेश_की_ग़ज़ल #अवधेश_की_शायरी #हिंदुस्तानी_ग़ज़ल

#आस_के_दीप_पास_जलते_हैं ।


आस के दीप पास जलते हैं ।

दूर गम के चिराग बुझते हैं ।


फोन देता नहीं ज़रा फ़ुर्सत,

अब कहाँ हम किताब पढ़ते हैं । 


तुम करो बैंक में जमा खुशियाँ,

हम भी गम बेमिसाल रखते हैं ।


झोंक देते तमाम ताकत हम,

तब कहीं ये इनाम मिलते हैं ।


रात भर नींद क्यों नहीं आती,

ख़्वाब अच्छे बुरे मचलते हैं ।


काम करते ख़राब वो अक्सर,

इसलिए ही सवाल उठते हैं ।


कुछ भी हासिल हमें नहीं होता,

आजमाईश खूब करते हैं ।


बेवफा याद जब हमें आते,

आब-ए-चश्म तब निकलते हैं ।


कर्ज़ का बोझ चढ़ गया सर पर,

इससे दबकर किसान मरते हैं ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना- 24092020

शिवपुरी मध्य प्रदेश

 

ग़ज़ल सुलह के कुछ नहीं आते नज़र आसार जाने क्यूँ

 #ग़ज़ल #अवधेश_की_ग़ज़ल #अवधेश_की_शायरी #हिंदुस्तानी_ग़ज़ल

#सुलह_के_कुछ_नहीं_आते_नज़र_आसार_जाने_क्यूँ 


सुलह के कुछ नहीं आते नज़र आसार जाने क्यूँ ।

उन्होंने तो बना ली बीच में दीवार जाने क्यूँ ।


लगाते हम हमेशा दम किसी भी खेल में पूरी,

अधूरी जीत मिलती है अधूरी हार जाने क्यूँ ।  


जिसे था खेलना दिल से खिलौना सा समझ तोड़ा,

हुआ था उस हसीना से हमें भी प्यार जाने क्यूँ ।


हकीमों की दवा भी तो असर कुछ अब नहीं करती,

सफाखाने हुए खुद ही बहुत बीमार जाने क्यूँ ।


कभी जो प्यार से बातें मुलाकातें किया करते,

ज़रा सी बात पर करते वही तक़रार जाने क्यूँ ।


किसी को मारकर कुछ भी कभी हासिल नहीं होता,

मगर फ़िर भी सभी रखते यहाँ हथियार जाने क्यूँ ।


परेशानी मिटाने को हमें हिम्मत दिलाते जो,

वही अब वक्त के हाथों हुए लाचार जाने क्यूँ ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना- 24092020

शिवपुरी मध्य प्रदेश 

ग़ज़ल भागती मुश्किलें और डर देखिए

 #ग़ज़ल #अवधेश_की_ग़ज़ल #अवधेश_की_शायरी #हिंदुस्तानी_ग़ज़ल

#भागती_मुश्किलें_और_डर_देखिए ।


भागती मुश्किलें और डर देखिए ।

माँ करे दुआ तो असर देखिए ।


रूठना छोड़कर मुस्कुराओ जरा,

इक नज़र प्यार से फ़िर इधर देखिए ।


देख मौसम हुआ फ़िर सुहाना बहुत,

साथ उनके किया जब सफ़र देखिए । 


पास उसके रहें डर नहीं है हमें, 

छोड़ वो भी रही सात घर देखिए ।


तुम तरसते रहे देखने को जिसे,

बाद मुद्दत मिले आँख भर देखिए ।


हर तरफ़ आग ही फैलती दिख रही,

देख पाते नहीं हम उधर देखिए ।


ज़िन्दगी आप का नाम ले कट रही,

जान हाज़िर करूँ इक नज़र देखिए ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना-24092020

शिवपुरी मध्य प्रदेश

ग़ज़ल पास में हम को बिठाया कीजिए ।

 #ग़ज़ल #अवधेश_की_ग़ज़ल #अवधेश_की_शायरी #हिंदुस्तानी_ग़ज़ल 


#पास_में_हमको_बिठाया_कीजिए 


पास में हमको बिठाया कीजिए ।

कुछ सुनो फिर कुछ सुनाया कीजिए ।


जब निराशा घेर ले तुमको कभी,

आस का दीपक जलाया कीजिए ।


आपके बिन हम नहीं रह पाएँगे,

यूँ नहीं हमको पराया कीजिए ।


मत लुटाओ आप दौलत इस तरह,

वक्त आड़े को बचाया कीजिए ।


साथ बीबी के रहोगे चैन से,

नाज नखरे भी उठाया कीजिए ।


रात गहरी नींद उड़ती हो कभी,

ख़्वाब में हमको बुलाया कीजिए ।


रो मचल सर पर उठाए आसमाँ,

हाथ झूले में झुलाया कीजिए ।


दूध का हो खून का या प्यार का,

कर्ज़ जो भी हो चुकाया कीजिए ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना

शिवपुरी मध्य प्रदेश