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परिचय

 नाम -इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना पिता का नाम- स्व.श्री मुरारी लाल सक्सेना शैक्षणिक योग्यता - DCE(Hons.),B.E.(Civil), MA ( Sociology), LL.B., ...

Friday, May 28, 2021

घनाक्षरी आज रात महारास

 #मनहरण_घनाक्षरी


#आज_रात_महारास 


सुगंधित रंग भरे, पुष्प पत्र लताओं से,

गाँव बाग मधुवन ,बगिया सजाएंगे ।

धर के रूप कोई भी, आज घर में आएँगीं,

शरद पूर्णिमा मना, लक्ष्मी को मनाएँगे ।

राग और अलंकार, मधुर-मधुर तान,

मोहित करने वाली, मुरली बजाएंगे ।

आज रात महारास,कृष्ण गोपियों के संग,

धर के अनेक रूप , झूमते रचाएंगे ।


इंजी.अवधेश कुमार सक्सेना-31102020

शिवपुरी मध्य प्रदेश

ग़ज़ल परेशां आज हर इक आदमी है

 #ग़ज़ल #अवधेश_की_ग़ज़ल 

#परेशाँ_आज_हर_इक_आदमी_है


परेशाँ आज हर इक आदमी है ।

लपेटे हर किसी को मुफ़लिसी है ।

ठहरती जो नहीं बहती अकड़ में,

समंदर में समा जाती नदी है ।

सताते थे रुलाते थे हमें पर,

तुम्हारी ही हमें खलती कमी है ।

हमें धोखा मिला जब बेवफ़ा से,

जिगर में आग आँखों में नमी है ।

कहाँ सोए कहाँ जागे करे क्या ?

ठिकाना ढूंढती आवारगी है ।

ज़रा फ़िर से मेरा तू जाम भर दे,

नशीली शाम अब ढलने लगी है ।

समंदर हैं कई नदियाँ निगलते,

बड़ी ज़ालिम हमारी तिश्नगी है ।

मिला के खीर में अमृत खिलाती,

शरद पूनम की ये जो चाँदनी है ।

फँसी है जान आफ़त में सभी की,

मगर देखो उन्हें अपनी पड़ी है ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना-31102020

विदाई सेवानिवृति

 #प्रियामृतावधेश

#विदाई #सेवानिवृति 


छिन 

जाते

सबसे ही 

अधिकार सभी

अधिवार्षिकी आयु

हो जाती जब पूरी 

ऑफिस और ऑफिसर भी

छूट जाते सभी झटके में 

जो भी आया है वो जाएगा ।

कर्मों के फल भी वो पाएगा ।

सुखमय होगा भावी जीवन

आगे स्वस्थ रहे तन मन

साथी करें कामना 

विदाई पलों में 

कर्म धर्म पथ 

बढ़े चलें

शुभ हों

दिन


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना- 30102020

शिवपुरी, मध्य प्रदेश

ग़ज़ल अब नई इक मिसाल रखते हैं

 #अवधेश की ग़ज़ल 

#ग़ज़ल

#अब_नई _इक_मिसाल_रखते_हैं 


अब नई इक मिसाल रखते हैं ।

हम झुकाकर कपाल रखते हैं ।


क्या मिलेगा हमें अदावत से,

दोस्ती को बहाल रखते हैं ।


क्या कहें हम जवाब में इनके,

आप ऐसे सवाल रखते हैं ।


वार करना ज़रा सम्हल कर तुम,

हम भी तलवार ढाल रखते हैं ।


मछलियों के नसीब में फँसना,

सारे मछुआर जाल रखते हैं ।


छोड़ कर वो चले गए हमको,

हम हमेशा मलाल रखते हैं ।


आपके साथ हो गया धोखा,

क्यों नहीं आप ख़्याल रखते हैं ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना- 30102020

शिवपुरी मध्य प्रदेश 

विजयादशमी

 #अवधेश_की_कविता

#विजया_दशमी_शुभ_हो 


भाई को जो  अपना सब कुछ  दे सकता हो ।

गुरु आज्ञा को जो सर माथे पर रखता हो ।

पापा के वचनों को  जो  पूरा करता हो ।

रघुवीरा के पथ पर जो हर दम चलता हो ।


विजया दशमी शुभ हो मैं उसको  कहता हूँ ।

रावण भक्तों से तो मैं  दूरी रखता हूँ ।

प्रभु चरणों को अपने  मैं मन में धरता हूँ ।

प्रभु भक्तों की सेवा मैं करता रहता हूँ ।


विजय दशमी की बधाई और शुभकामनाएं ।


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना - 25102020

शिवपुरी मध्य प्रदेश

विजया दशमी 2020

प्रियामृतावधेश जीवन नदिया

 #प्रियामृतावधेश

#जीवन_नदिया 


सम

रहना

सुख दुख में

जीवन नदिया

बहती जाती है 

उदगम से सागर तक 

किनारे साथ चलते हैं 

सागर में वो जब मिलती है

सब कुछ यहीं पर छूट जाता है ।

बंधन सभी से  टूट जाता है ।

चलते ही रहना है हरदम

सुख आए या दुख आए 

रुकना तुम नहीं कहीं 

थकना नहीं कभी

मंज़िल पाकर

चैन मिले

लेना

दम


इंजी. अवधेश कुमार सक्सेना-23102020

शिवपुरी मध्य प्रदेश 

Thursday, October 22, 2020

अनुक्रमणिका

 अनुक्रमणिका

1 खा रहीं हैं रोटियॉँ

2 अकेली डगर से

3 कतआ

4 गुलाबों सी महक होगी

5 मीठे सपने दिखाकर 

6 मत कहना भगवान नहीं है

7 चाँद तो बढ़ता रहा

8  कहो आपको क्या मुहब्बत नहीं 

9 हसरत एक पलती है

10 मौसम सुहाना याद है

11 न वो मौसम हवाओं के 

12 गेंहूँ की बालियों से 

13 पर्दा बस निगाहों का रहे

14 गंगा में नहाया जाए

15 सँवरने की ज़रूरत  क्या है 

16 आप घर का कभी पता देते

17 वो मनाता भी नहीं

18 परम्परा एक डाल देंगे

19 ये सबक बढ़िया मिला

20 अहसास पर्वत के

21 भगवान साथ चलता है

22 पाक मुहब्बत है

23 वो आया निखरकर ही

24 मील के पत्थर 

25 गुनगुनाते रहे हैं

26 प्यार के सिलसिले हो गए

27 ये पर्दा हटा दो

28 रंगत बदलती जा रही है 

29 गीत हमने खुशी के गाए हैं 

30 कहीं और दिल को लगाया कहाँ है

31 जनता को रुलाते देखा

32 देश से मुहब्बत की

33 हमें देख वो मुस्कुराने लगे हैं

34 बाग में फूलों के जैसे तितलियाँ

35 अगर हमसे मुहब्बत है

36 सूरत दिलनशीं की

37 दिल तो मिलाओ कभी

38 आंखे

39 हर जंग जीतते हैं

40 कत आ -कभी मांगते थे

41 तुझे मैं चाँद ला दूँगा

42 मामला क्या है

43 अकेले सफ़र में

44 रिश्ता नहीं निभाया है

45 आदमी मैं आम था

46 शिकायत क्या

47 देखो ज़रा नज़ारे

48 वक़्त ये भी हमारा निकल जाएगा

49 करिश्मे हमें वो दिखाता है

50 प्यार का तोहफ़ा हो गया

51 जगाते रहो

52 पत्थर हटाते रहो

53 ख़िलाफ़त रहे

54 मिलेगी खुशी कभी

55 गाते हुए सुनाना

56 वीर मरते नहीं

57 इनायत हो रही है

58 कौन समझेगा हमारी बेकसी को

59 दिल बेकरार शामिल है

60 ज़रा अहसान कर दो 

61 बंद मैखाना हुआ

62 सफ़र ज़िन्दगी

63 प्यार का इज़हार है

64 वो इतराते हैं

65 ये खुशी कैसे कहूँ

66 फूल तो खिला नहीं

67 सम्हलना चाहिए था

68 ज़ख्म दिखाया नहीं गया

69 बस इक ख़ुदा से डरते हैं

70 किस्सा नहीं है

71 ख़्वाब तू माँ बाप के साकार कर

72 रोशनी रह गई  

73 तुम्हीं से प्यार करना है

74 सोच से नफ़रत निकल कर जो गई

75 बेवफ़ाओं से प्यार कौन करे

76 आपको मुझसे कहो कोई शिकवा तो नहीं

77 ख़ुदा का काम है यारो

78 तीरगी जब इधर हो गई

79 प्रेम रस का गीत फिर गाना हमें

80 दोस्ती करके दगा की

81 वक़्त अपना यूँ नहीं जाया करो

82 हिमालय को पिघलना चाहिए था

83 कली खिली जो ज़रा चमन में 

84 आरज़ू मिट गई आसरा मिल गया

85 परेशाँ हैं पाबंदियों से

86 जीतना हो युद्ध अगर अधिकार का

87 मर्ज़ बढ़ते रहे पुराने भी

88 आज बीरान हैं जो शहर थे यहाँ

89 आँसुओं से शमाँ जलाई है

90 किनारे मैं देखता जा रहा हूँ

91 जब मिला धोखा मिला है

92 नादान मुसाफ़िर को बेख़ौफ़ गुज़रने दो

93 दूर हो तुमने बना लीं दूरियाँ 

94 वो नज़र आ रही रोशनी की तरह

95 पास में हमको बिठाया कीजिए

96 भागती मुश्किलें और डर देखिए

97 सुलह के कुछ नहीं आते नज़र आसार 

98 आस के दीप पास जलते हैं

99 क्या पता क्या गिला हो गया

100 चलो आस का एक दीपक जलाएँ

101 जल रहा था वो दिया

102 याद आते नहीं 

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